karak kise kahate hain [ कारक की पहचान भेद और उदहारण ]

हेलो मित्रो आप सभी लोगो का आज के इस लेख में बहुत बहुत स्वागत है आज के इस लेख में हम सब जानेंगे की कारक किसे कहते है? karak kise kahate hain | कारक क्या होता है?कारक की पहचान कैसे करते है?कारक के भेद कितने होते है? साथ साथ इन सबके उदहारण भी देखेंगे | आइये सबसे पहले जान लेते है की हम इस लेख को पढ़े क्यों?

 

निम्न परीक्षाओं के लिए उपयोगी-

अगर आप किसी ONE DAY exam की तैयारी कर रहे है जिसमे हिंदी विषय को पूछा जाता है तो यह आपके परीक्षा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण शाबित हो सकता है |

कारक किसे कहते है? [ karak kise kahate hain ]

संज्ञा या सर्वनाम का सम्बन्ध वाक्य के अन्य शब्दों से बताने वाले शब्दों को कारक कहते है | कारक कृ क्रिया धातु से मिलकर बना शब्द है जिसका अर्थ करना से होता है |

जिसका क्रिया से सीधा सम्बन्ध हो उसे कारक कहते है |

कारक की संख्या-

कारक की संख्या हिंदी में आठ तथा संस्कृत में छ होती है | संस्कृत में सम्बन्ध वा संबोधन को कारक नहीं माना जाता है | विभक्ति की कुल संख्या सात होती है क्योकि संबोधन में प्रथमा विभक्ति होती है |

नोट- कारक चिन्ह का दूसरा नाम परसर्ग होता है |

कारक का नाम, कारक चिन्ह और उनकी विभक्ति की सारणी-

विभक्ति कारक कारक चिन्ह/परसर्ग
प्रथमा कर्ता ने
द्वतीय कर्म को
तृतीया करण से / के द्वारा
चतुर्थी सम्प्रदान के लिए, साथ,सहयता
पंचमी अपादान से अलग होना (अलगाव)
षष्ठी सम्बन्ध का,की,के.रा,री,रे
सप्तमी अधिकरण में,पे,पर
प्रथमा संबोधन हे!,ऐ!,अरे!,हैलो!

कारक के भेद-

कारक के मुख्यता आठ भेद होते है | अभी तक हम लोगो ने देखा की कारक किसे कहते है? karak kise kahate hain  कारक की संख्या क्या है? कारक की पहचान कैसे करे? अब हम लोग कारक के सभी प्रकारों को उदहारण सहित समझेंगे | जो इस प्रकार से निम्नलिखित है-

कर्ता कारक-

इसका पहचान चिन्ह “ने” होता है | जो कार्य करने के लिए स्वतंत्र हो, जिसका क्रिया से सम्बन्ध प्रबल हो तथा जो क्रिया के सम्पन्न होने का शूत्राधार हो वहा कर्ता कारक होता है | इनमे से कोई एक भी वाक्य में मिल रहा है तो वहा कर्ता कारक ही होगा |

उदहारण-

  • राम पुस्तक पढता है |
  • बच्चा रोता है |
  • वे मैदान में खेलते है |
  • पक्षी आकाश में उड़ते है |
  • राधा ने जलेबी बनायी |

वाक्य के भेद,अंग, अवयव और उदहारण [ vakya ke bhed ]

Kriya Ke Bhed:क्रिया किसे कहते है? [सम्बंधित उदाहरण ]

कर्म कारक-

इसका पहचान चिन्ह “को” होता है | कर्ता जिसे पसंद करता है, जो करता के लिए इष्ट, अभीष्ट और इच्छित हो, कर्ता जिसे सबसे पहले करता हो, जहा निकट समीप आसा पास शब्दों का प्रयोग हो, जहा दोनों ओर (उभय), चारो ओर (परित) का प्रयोग किया जाये वहा कर्म कारक होता है |

उदहारण-

  • राम गाव में जाता हुआ फूल तोड़ता है |
  • राम ने रावण को मारा |
  • मेरे घर के निकट गंगा बहती है |
  • विद्यालय के चारो ओर वृक्ष है |
  • गाव के चारो ओर तालाब स्थित है |

 

करण कारक- (से के द्वारा )

क्रिया की सिद्धि में सहायक कारक को करण कहते है |

क्रिया की सम्पन्नता के लिए जी साधन हेतु माध्यम / कारण का प्रयोग किया जाता है करण कारक कहलाता है |

शरीर के जिस अंग में विकार या बीमारी हो उसमे करण कारक तृतीय विभक्ति होती है |

क्रिया के लिए उपलब्ध साधन करण कहलाते है |

उदहारण-

  • राम ने रावण को बाण से मारा |
  • पिता जी कर से कार्यालय जाते है |
  • बच्चे पुस्तक द्वारा पढ़ते है |
  • तुलसीदास के दवरा रामचरित ग्रन्ध लिखा गया |
  • मोहन सिर से गंजा है |
  • सूरदास जन्म से अन्धा है |

सम्प्रदान कारक (के लिए/ साथ/ सहायता/ मदद)

जिसके लिए कार्य किया जाये, जिसकी सहायता या साथ लेकर कार्य हो, जहा स्वेच्छा से मदद या सहायता की जाये, जिसको कोई वस्तु या पदार्थ हमेशा हमेशा के लिए दिया जाये बदले में कुछ न ले, जो वस्तु अच्छी हो रुचिकर लगे | आदि जगहों पर सम्प्रदान कारक होता है |

उदहारण-

  • राम ने रावण को सीता के लिए मारा |
  • आप भर्ती होने के लिए पढ़ रहे हो |
  • सेठ ने गरीबो को कम्बल बाटे |
  • भारत ने अफगानिस्तान की आर्थिक मदद की |
  • सैनिक देश के निमित्त बलिदान देते है |
  • मुझे लड्डू बहुत अच्छे लगते है |

अपादान कारक- (से अलग होने पर / अलगाव पाया जाये )

जिस आधार स्थान जगह से कोई वस्तु पदार्थ प्राणी का अलग होना पाया जाये जिससे वह वस्तु अलग होती है उसमे अपादान कारक होता है |

उदहारण-

  • गंगा हिमालय से निकलती है |
  • पेड़ से पत्ते गिरते है |
  • चूहा बिल से बाहर निकला |
  • आप घर से बाहर खड़े होकर क्यों बात करते हो |

सम्बन्ध कारक- (का,की,के,रा,री,रे)

जहा किसी संज्ञा या सर्वनाम का दूसरी संज्ञा या सर्वनाम के साथ सम्बन्ध बताया जाये, संज्ञा का संज्ञा के साथ, संज्ञा का सर्वनाम के साथ तथा सर्वनाम का सर्वनाम के साथ और सर्वनाम का संज्ञा के साथ सम्बन्ध प्रकट हो |

उदहारण-

  • यशोदा श्रीकृष्ण की माता है |
  • दशरथ राम के पिता थे |
  • यह मेरा भाई है |
  • राम की गए चरति है |
  • वह पुस्तक मोहन की है |
  • ये पुस्तके मेरी थी |

 

अधिकरण करक (में,पे,पर)

अधिकरण आधार को कहते है | आधार दो प्रकार के होते है | कलाधिकरण वा स्थानाधिकरण |

जिस आधार से समय का बोध हो कलाधिकरण कहलाता है | जैसे- दिन ,दिवस, रात, रात्री, संध्या ,प्रातः सुबह सबेरा ,सेकेण्ड,मिनट,घंटा,महिना,वर्ष आदि |

जिस आधार से स्थान या जगह का बोध हो उसे स्थानाधिकरण कहते है | जैसे-मेज, कुर्सी,पेड़ आदि आधार का कार्य करते है |

उदहारण-

  • मै पांच मिनट में आ रहा हु |
  • आप दिन में पढ़ा करो |
  • मै रात में सो नहीं पता हु |
  • मै सुबह के समय रोज टहलने जाता हु |
  • रात्रि में भोजन कम करना चहिये |
  • प्रातः जल्दी जागना कहिये

 

सम्बोधन कारक (हे! , अरे!, भो !)

जब किसी को बुलाया जाये, पुकारा जाये स्मरण किया जाये, स्तुति भजन कीर्तन हो तो तथा वहा संबोधन का चिन्ह लगा हो उसे संबोधन कर्क कहते है |

उदहारण-

  • शाबाश! भारत मैच जीत गया |
  • हे भगवन! मै पास हो जाऊ |
  • अरे! इधर आओ |
  • अजी! आप तो सुनते ही नहीं हो |
  • हे छात्रो! आप मेरी किसी भी बात का बुरा नहीं मानोगे |
  • हे प्यारे बच्चो! मै आपकी भलाई के लिए ये सब कहता हु |

आपने अभी पढ़ा की karak kise kahate hain | आइये अब आगे कुछ और महत्वपूर्ण बातो के बारे में जानते है |

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