Process of clotting of blood [ रक्त का थक्का जमना ]

रक्त का थक्का जमने के लिए सबसे जरुरी है चोट लगना | जब तक हमें चोट नहीं लगेगी तब तक blood का थक्का नहीं जमेगा | हमारे शरीर में एक हिपैरिन नामक प्रोटीन पाया जाता है जो blood को शरीर के अंदर जमने से रोकता है | अगर शरीर के अंदर blood जमने लगे तो व्यक्ति की मृत्यु हो जाएगी | आइये हम विस्तार से जानते है की चोट लगने के बाद रक्त का थक्का कैसे बनता है? रक्त का थक्का जमने में कौन कौन से अंगो की जरुरत होती है |

Process of clotting of blood

जब हमें चोट लगती है तो चोट लगने के स्थान से कैल्शियम रिलीज होने लगता है जो की एक खनिज होता है | यही कैल्शियम प्लाज्मा में पाए जाने वाले Prothrombin नामक प्रोटीन से जा कर मिलता है, यह Prothrombin उस समय निष्क्रिय अवस्था में रहता है | इसको सक्रिय करने के लिए एक Thromboplastin नामक एक प्रोटीन शरीर में पाया जाता है | उसके बाद Prothrombin जाकर Thromboplastin से मिलता है और  (फैक्टर-9 उत्प्रेरक की उपस्थिति में) एक नया प्रोटीन Thrombin बनता है | यही Thrombin हमारे शरीर में पाए जाने वाले Anticlotting Agent हिपैरिन को जा कर Deactivate (निष्क्रिय) कर देता है | फिर यही Thrombin आगे बढ़ता है और प्लाज्मा से बनने वाले Fibrinogen नामक प्रोटीन को (पेप्सीन नामक एंजाइम जो पेट में बनता है | यह उत्प्रेरक का कार्य करता है |) सक्रीय कर देता है | और एक नया प्रोटीन Fibrin बनाता है | यह Fibrin एक तार के तरीके का होता है | यह फाइब्रिन blood में पाए जाने वाले प्लेटलेट्स के अणुओं को (विटामिन-K की उपस्थिति में) एक- दुसरे में बाध देता है और एक जाल की तरह बना लेता है | जिससे हमारा blood ऊपर नहीं आ पाता और रक्त का थक्का बन जाता है | जिससे चोट लगे हुए स्थान से blood आना बंद हो जाता है |

Note-फैक्टर-9 (Factor-9) यह एक प्रकार का प्लेटलेट्स से बनने वाला प्रोटीन होता है | इसकी खोज Christmas (क्रिसमस) नामक व्यक्ति ने की थी इसलिए इसे Christmas Factor भी कहते है | यह हमारे शरीर में Blood Clotting में उत्प्रेरक की तरह कार्य करता है |

Catalyst (उत्प्रेरक) उत्प्रेरक वह होता है जो अभिक्रिया की दर को बढ़ा देता है | blood clotting में फैक्टर-9, पेप्सिन, तथा विटामिन-K जैविक उत्प्रेरक की तरह कार्य करते है |

 

 Ca+Prothrombin+Thromboplastin=Thrombin

 Thrombin+Fibrinogen=Fibrin

Fribin+Blood(Plat)=Clot (थक्का)

 

Process of clotting of Blood  (रक्त का थक्का) और Blood Coagulation (रक्त का स्कंदन) में क्या अंतर है?

जब blood का थक्का हमारे शरीर के अंदर बनता है तो उसे blood Clotting कहते है | और जब यही रक्त हमारे शरीर से बाहर निकलता है उसके बाद जब वह थक्का बनता है उसे blood Coagulation कहते है | जैसे किसी व्यक्ति का blood यदि जमीन पर गिर जाता है और वहा पर जा कर थक्का बनता है तो वह रक्त का स्कंदन (Coagulation) होगा |

Blood बैंक में किस Anticoagulation (प्रतिस्कंदन) एजेंट का उपयोग किया जाता है?

जब हम आपने शरीर से रक्त का दान करते है और रक्त बहार कही स्टोर किया जाता है तो उस रक्त को जमने से रोकने के लिए एक सोडियम अक्जिलेट / सोडियम साइट्रेट  प्रतिस्कंदन एजेंट मिलाया जाता है | जो बहार रखे हुए blood को जमने (थक्का बनने) से रोकता है |

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