मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान | भारत में तुर्की आक्रमण

भारत में तुर्की आक्रमण : महमूद गजनी ,मुहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान 

हेल्लो मित्रो आप लोगो का jksguru.com में बहुत बहुत स्वागत है | क्या आप लोगो को इतिहास पढने में कठिनाई होती है? क्या आप सभी लोगो को इतिहास के date को याद करने में समस्या आती है? तो अब चिंता करने की कोई बात नहीं है? बस करना ये है आप लोगो को इस आर्टिकल को सही तरीके पढना है | उसके बाद आपको इस पोस्ट से सम्बंधित कोई भी ऐसा date नहीं बचेगा जो आपको याद न हुआ हो | इस आर्टिकल में हम लोग जानेंगे की भारत में तुर्की कैसे आये? कौन कौन से युद्ध हुए? महमूद गजनी, मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान कौन था? भारत पर इन लोगो ने कितनी बार आक्रमण किया है? इन सब का कच्चा चिटठा खोलेंगे | बस इस पोस्ट को पूरा पढ़े |

गजनी वंश की शुरुआत

सबसे पहले हम जान लेते है महमूद गजनवी कौन था और वह कहा से भारत आया? महमूद गजनवी टर्कि (तुर्की) देश का तथा  तुर्की में एक गजनी (जो की वर्तमान में अब अफगानिस्तान में है |)  नामक स्थान है जहा पर यामिनी वंश जिसे गजनी वंश भी कहा जाता है जिसका संस्थापक अलप्तगीन उसके  गुलाम  सुबुक्तगीन का बेटा था | इसे आप एसे समझ सकते है |

तुर्की स्थान   

गजनी

  वंश

यामिनी

 

संस्थापक अल्पतगीन

 

गुलाम सुबुक्तगीन

 

बेटा महमूद गजनवी

 

अब यहाँ जानना आवश्यक हो जाता है आखिर महमूद गजनवी को भारत आने की जरुरत करो पढ़ी?

अलप्तगीन के मृत्यु के बाद गजनी का शासक उसका गुलाम तथा महमूद गजनवी का पिता सुबुक्तगीन बना | उस समय भारत में पेशावर पर ब्राह्मण वंश का राजा जयपाल शासन कर रहा था | सुबुक्तगीन बार बार पेशावर पर आक्रमण किया करता था | हर बार उसे असफलता ही मिलती थी फिर भी वह आक्रमण किया जा रहा था | सन 998 में एक दिन सुबुक्तगीन पेशावर पर आक्रमण करने आया तभी पेशावर के राजा जयपाल ने उसे हरा कर सन 998 में उसकी हत्या कर दी | आपने पिता की हत्या के बाद गजनी वंश की गद्दी पर 998 में ही महमूद गजनवी बैठा और उसने कश्म खाया की वह हर साल हिंदुस्तान पर आक्रमण करेगा | यही कारण है महमूद गजनवी ने भारत पर 17 बार आक्रमण किया था | 

महमूद गजनवी (1000 से 1027 ई0)

  महमूद गजनवी का भारत पर आक्रमण करने का दो ही उद्देश्य था एक लूट-पाट करना और दूसरा यहाँ पर बने हुए मंदिरों के मूर्तियों  को नष्ट करना क्योकि उस समय भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था यहाँ पर धन संपदा भरी पढ़ी हुई थी |  और इस्लाम धर्म में मुर्ति पूजा नहीं की जाती है | | उसके द्वारा किये गए कुछ महत्वपूर्ण आक्रमण  निम्नलिखित है 

1.   सबसे पहला आक्रमण महमूद गजनवी ने भारत पर 1000 ई0 में पेशावर के महराजा जयपाल पर किया लेकिन इस आक्रमण का कोई परिणाम नहीं निकला |

2.    फिर अगले वर्ष 1001ई0 में महमूद गजनवी ने पेशावर पर आक्रमण किया और राजा  जयपाल को हरा दिया | लेकिन जयपाल को छोड़ दिया | राजा जयपाल इस हार के शोक को सहन न कर सके उन्होंने खुद आत्म हत्या कर ली | लेकिन महमूद गजनवी यही नहीं रुका वर आक्रमण करता गया क्योकि उसने कश्म खा रखी थी |   

3.   1006 ई0 में में उसने हिमांचल प्रदेश के नगरकोट मंदिर पर आक्रमण कर लूट-पाट किया |

4.   1008 ई0 में उसने महराजा जयपाल के बेटे आनंदपाल पर आक्रमण करके पराजित किया |

5.   1011 तथा 1012 में उसने मथुरा और उज्जैन के कई मंदिरों पर आक्रमण किया और मंदिरों में बनी हुई मूर्तियों को तोड़वा दिया तथा सोने, चांदी, जवाहरतो को लूट ले गया |

6.   1014 ई0 में उसने स्थानेश्वर महादेव मंदिर (जो की हरियाणा के कुरुक्षेत्र में है) पर आक्रमण किया और लूट-पाट किया लेकिन उसने यहाँ पर आक्रमण करने के बाद यही पर बने चक्रश्वामी की मूर्ति (भगवान श्री कृष्ण) को नष्ट किया न की महादेव के मंदिर को |

7.   16 वा आक्रमण उसने 1025 ईo में गुजरात के सोमनाथ मंदिर पर किया | सोमनाथ मंदिर का निर्माण चालुक्य वंश के शासक भीम प्रथम ने करवाया था | महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर के अंदर बने महादेव के सोने के मंदिर को लूट लिया तथा वहा पर बने सोने के दरवाजे को लूट कर भागने लगा भागते समय उसे राजस्थान में जाटो के द्वारा रोक लिया गया और सोने के दरवाजे छीन लिया गया | इसी के विरोध में उसने अगला आक्रमण किया |

8.   1027 ईo में महमूद गजनवी ने आपना अंतिम आक्रमण सोने के दरवाजे को छिनने के विरोध में जाटो के ऊपर किया | उसने जाटो को हराकर वापस गजनी चला गया |

गजनी जाने के बाद सन 1030 ईo में उसकी मृत्यु हो गयी |

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प्रसिद्ध पुस्तक और लेखक

महमूद गजनवी के शासन काल में लिखी गयी महत्वपूर्ण पुस्तके एवं लेखक जो परीक्षा की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है |

 

लेखक                                 पुस्तक

अलबरुनी                           तहकिके-ए-हिन्द / किताब-उल-हिन्द

फिरदौसी                            शाहनामा

उतबी                                  चचनामा

बैहाकी                                 तरीके-सुबुक्तगीनी

 

#नोट- महमूद गजनवी भारत का पहला मुस्लिम था जिसने सुल्तान और गांजी की उपाधि धारण की थी | गैर मुसलमानों को मरने वालो को गांजी कहा जाता है |

मुहम्मद गौरी (1175 से 1206 ई0)

मुहम्मद गौरी संसबानी तुर्की था जो गजनी में गोर वंश को चला रहा था | वह भी गजनी से भारत आया हुआ था |  गौरी का भारत आने का उद्देश्य महमूद गजनवी से थोडा अलग था | उसका भारत आने का मुख्य उद्देश्य था- भारत में गजनी वंश का साम्राज्य का विस्तार करना |

मुहम्मद गौरी ने भारत पर सबसे पहले आक्रमण 1175ईo में  सिंध के मुल्तान नामक स्थान पर (जो की वर्तमान समय में पाकिस्तान में है) करमाथी मुसलमानों पर किया | जहा पर उसने बहुत लूट-पाट की और गजनी वापस चला गया | मुहम्मद गौरी ने भी यह कहानी सुना था की गजनी का एक शासक महमूद गजनवी ने गुजरात के सोमनाथ मंदिर को कई बार लूटा था | जहा पर बहुत धन सम्पदा है | उसने भी ठान लिया की वह भी गुजरात पर आक्रमण करेगा | और  सन 1178 ईo में मुहम्मद गौरी ने गुजरात पर आक्रमण कर दिया | उस समय गुजरात में चालुक्य वंश का शासक भीम-2nd (मूलराज 2nd) राज्य कर रहा था उसकी सेना मुहम्मद गौरी से बड़ी थी | अत भीम-2nd ने मुहम्मद गौरी के ऊपर उल्टा आक्रमण कर दिया और 1178 ईo में भीम-2nd   ने मुहम्मद गौरी को सर्वप्रथम  माउन्ट आबू (राजस्थान में है) में हरा दिया | माफ़ी मागने पर भीम-2nd  ने मुहम्मद गौरी को माफ़ करके छोड़ दिया | मुहम्मद गौरी वहा से भागकर 1179 ईo में कश्मीर आ गया और वहा पर राज्य करने लगा |

मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान

उस समय दिल्ली,अजमेर और सांभर पर चौहान वंश का राज्य था | जिसकी राजधानी अजमेर हुआ करती थी | और वहा पर एक शासक पृथ्वीराज चौहान (राय पिथौरा) हुआ करता था | पृथ्वीराज चौहान के दरबार में एक दरबारी कवी हुआ करते थे चन्द्रबरदाई जिन्होंने पृथ्वीराज रासो की रचना की थी |

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पृथ्वीराज रासो के अनुसार- जब पृथ्वीराज चौहान अजमेर पर राज कर रहा था तब मुहम्मद गौरी उस पर बार बार आक्रमण किया करता था | पृथ्वीराज चौहान की सेना काफी बड़ी थी अत वह बार बार मुहम्मद गौरी को हरा दिया करता था | और मुहम्मद गौरी माफ़ी मांग लिया करता था तथा पृथ्वीराज चौहान माफ़ कर दिया करता था जिससे वह वापस चला जाया करता था | यही प्रक्रिया लगभग 16 बार तक चलती रही | वह आक्रमण करता और पृथ्वीराज चौहान उसे माफ़ कर दिया करते | 17 वी बार दोनों के मध्य एक बड़ा युद्ध होता है |

तराईन का प्रथम युद्ध (1191 ईo)

मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान के मध्य 1191 में हरियाणा के करनाल जिले में तराईन नामक स्थान पर विषण युद्ध हुआ | जिसमे पृथ्वीराज ने मुहम्मद गौरी को बुरी तरह से परास्त कर दिया | किसी तरीके से मुहम्मद गौरी वह से जान बचा कर भाग निकला |

उसी समय उत्तर प्रदेश के कन्नौज नामक स्थान पर गढ़वाल वंश का शासक जयचंद शासन कर रहा था | जिसकी एक बेठी थी जिसका नाम संयोगिता था और पृथ्वीराज चौहान उसी से प्रेम करता था | पृथ्वीराज चौहान संयोगिता से शादी करना चाहता था | जो की उसके पिता जयचंद को बिल्कुल पसंद नहीं था | एक बार जयचंद ने आपनी बेठी संयोगिता के शादी के लिए स्वयम्वर रखा जिसमे बहुत सारे राजा महराजा को बुलवाया लेकिन पृथ्वीराज चौहान को नहीं बुलाया | इसे बात को लेकर पृथ्वीराज चौहान गया और भरे स्वयम्बर से संयोगिता को आगाह कर लाया और शादी कर लिया | यह बेइज्जती जयचंद को तनिक भी पसंद नहीं आया |

उसी समय मुहम्मद गौरी दोबारा पृथ्वीराज पर आक्रमण करने की योजना बना रहा था और पृथ्वीराज चौहान प्रेम में बिजी था | उसी समय-

तराईन का प्रथम युद्ध (1192 ईo)

मुहम्मद गौरी ने दोबारा पृथ्वीराज चौहान के ऊपर आक्रमण कर दिया और सन 1192 ईo में मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान के मध्य तराईन का दूसरा युद्ध लड़ा गया | जिसमे इतिहास का बहुत बड़ा उलट फेर हुआ और पृथ्वीराज चौहान की हर हुई | इसमे मुहम्मद गौरी का साथ जयचंद दे रहा था | मुहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज चौहान को मार कर हिंदुस्तान में एक नए वंश मुस्लिम वंश की शुरुआत की |

पृथ्वीराज रासो के अनुसार- चन्द्रबरदाई ने पृथ्वीराज रासो में लिखा है की तराईन के दुसरे युद्ध के बाद मुहम्मद गौरी ने पृथ्वीराज को मारा नहीं बल्कि उसको अन्धा करवा दिया था | और पृथ्वीराज चौहान और चन्द्रबरदाई को लेकर गजनी गया | पृथ्वीराज चौहान शब्दभेदी बाण (बिना देखे आवाज को सुनकर कर दुश्मन पर वर करना) चलाना जानते थे | एक दिन मुहम्मद गौरी जब गजनी में था तो वह खेल का आयोजन किया था | जिसमे धनुष से निशाना लगाना था | तभी चन्द्रबरदाई ने पृथ्वीराज से निशाने लगावाने के लिए मुहम्मद गौरी से कहा और उनके शब्दभेदी गुण को बताया | और कहा आप जैसे कहेंगे चलाओ तुरंत बाण चला देंगे | एसा ही हुआ चन्द्रबरदाई ने धनुष और बाण लाकर पृथ्वीराज को दिया और धीमे से कहा जैसे चलाओ की आवाज आपको सुनाई देगी आप तुरंत बाण मुहम्मद गौरी की ऊपर चला देना यह मौका मत छोड़ना और ठीक ऐसा ही हुआ बाण जाकर मुहम्मद गौरी को लगी और वह मारा गया | लेकिन ये सभी घटनाये केवल चन्द्रबरदाई ने आपने पृथ्वीराज रासो में लिखा है |

इतिहासकार इसे काल्पनिक मानते है | इतिहासकारो का मानना है की मोहम्मद गौरी और पृथ्वीराज चौहान के मध्य केवल दो ही तराईन के युद्ध हुए थे | जिसमे दुसरे में पृथ्वीराज मारा गया था | और किसी भी परीक्षा की दृष्टि से यही दोनों महत्वपूर्ण है |

1192 में ख्वाजमुइनुद्दीन चिश्ती ने भारत में भारत में सूफी मत की शुरुआत की | अजमेर में इन्ही की दरगाह है जिसे “दरगाह अजमेर शरीफ” के नाम से जाना जाता है |

1193 ईo में गौरी ने दिल्ली को आपनी राजधानी बनाया | अगले वर्ष में

चन्दावर का युद्ध (1194 ईo)

जयचंद और मुहम्मद गौरी के मध्य सन 1194 ईo में चन्दावर का युद्ध हुआ जिसमे मुहम्मद गौरी ने जयचंद को परास्त करके उसकी हत्या कर दी | चन्दावर का युद्ध जिताने में मुहम्मद गौरी का साथ उसका दामाद और गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक ने दिया | जब मुहम्मद गौरी भारत आया था तो उसने आपने साथ बहुत सारे आपने गुलामो लेकर आया था | जिसमे मुख्यतः चार गुलाम थे-

1.   ऐबक

2.   यल्दौज

3.   कुबाचा

4.   बख्तियार खिलजी

चन्दावर के युद्ध में ऐबक के अच्छा प्रदर्शन करने के कारण गौरी ने उसे आपना कार्यभार सौप और कहा मैंने मुस्लिम धर्म तो स्थापित कर दिया लेकिन इस्लाम धर्म का प्रचार प्रसार करने का काम  मै तुम्हे सौप रहा हु और वह वापस गजनी चला गया |  

उसी समय 1194 ईo में कुतुबुद्दीन ऐबक ने हिंदुस्तान में इस्लाम धर्म का प्रचार करने के लिए दो मस्जिदों का निर्माण करवाया |

1.   कुव्वत-उल-इस्लाम (दिल्ली में)

2.   अढाई दिन का झोपड़ा (अजमेर)

1199 ईo में उसने कुतुबमीनार का निर्माण शुरू करवाया | जिसे आगे चलकर 1229 ईo में इल्तुतमिश ने पूरा करवाया | कुतुबमीनार की कुल उचाई 73 मीटर है |

1205 में मुहम्मद गौरी हिंदुस्तान वापस आया और एक साल तक रहा फिर वह 1206 ईo में जब हिंदुस्तान से गजनी इल्तुतमिश के साथ वापस जा रहा था तभी उस पर कश्मीर में जाटो ने आक्रमण कर दिया जिससे वह बुरी तरह से घायल हो गया जहा से उसे इल्तुतमिश ने बचाकर गजनी ले गया और सन 1206 ईo  में ही गजनी में मुहमद गौरी की मृत्यु हो गया |

गौरी के मृत्यु के बाद यल्दौज को गजनी का उत्तराधिकारी, कुबाचा को काबुल और कंधार का तथा हिंदुस्तान का राज्य कुतुबुद्दीन को मिला | कुतुबुद्दीन ऐबक ने 1206 में हिंदुस्तान में गुलाम वंश की स्थापना की जो 1526 तक चलता रहा |

आज के से आर्टिकल में यही तक अगले आर्टिकल में हम सब दिल्ली सल्तनत के बारे में विस्तार से जानेंगे | आशा है आपको हमारा यह आर्टिकल काफी पसंद आया होगा बहुत कुछ जानकारी आपको मिली होगी | अगर किसी तरीके का आप सुझाव हमें देना चाहते है या इस आर्टिकल से सम्बंधित  आपका कोई प्रश्न हो तो आप comment Box में पूछ सकते है |


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